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आख़िर ईरान का कसूर क्या है जिसे अमरीका और सऊदी अरब मिटाना चाहते हैं

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप अमरीकी सुरक्षा में ईरान को सबसे बड़ा ख़तरा बता रहे हैं.

लेकिन 2003 में अमरीका ने यह तर्क देकर इराक़ पर हमला किया था तो उसके सारे तर्क ग़लत साबित हुए थे और जो कुछ हासिल हुआ उससे वो ख़ुश भी नहीं था.

ऐसे में ईरान के साथ क्या अमरीका वही ग़लती करेगा जो इराक़ के साथ कर चुका है? कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान के साथ अमरीका युद्ध में जाता है तो वो इराक़ युद्ध से सबक़ के साथ जाएगा.

1979 से ही ईरान संकट को लेकर अमरीका एक किस्म की नकारात्मक राय रखता है. ऐसे में ट्रंप और उनके सलाहकारों के लिए ईरान के ख़िलाफ़ चीज़ों को पेश करने में बहुत दिक़्क़त नहीं होती है.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना है कि मध्य-पूर्व की तमाम समस्याओं की जड़ में ईरान है. लेकिन हक़ीक़त यह है कि आज की तारीख़ में ईरान आक्रामक नहीं है बल्कि अमरीका का सबसे क़रीबी सहयोगी सऊदी अरब ज़्यादा आक्रामक है.