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असम: कारगिल जंग लड़ने वाले सैनिक को विदेशी घोषित करने के मामले में नया मोड़, जांच अधिकारी पर एफआईआर

नई दिल्ली। असम के रहने वाले पूर्व सैनिक मोहम्मद सनाउल्लाह को विदेशी घोषित करने और उनको कस्टडी में लेने के मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में अब जांच अधिकारी सवालों के घेरे में है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच कर रहे अधिकारी चंद्रमल दास ने मामले में कोई हकीकात की ही नहीं और एक फर्जी जांच रिपोर्ट तैयार कर दी। जिसके चलते पूर्व सैनिक को ना सिर्फ विदेश घोषित कर दिया गया बल्कि उनको हिरासत में लेकर डिटेनशन कैंप भी भेज दिया।

सनाउल्लाह मामले की जांच करने वाले अधिकारी, रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर चंद्रामल दास के खिलाफ खुद को केस में गवाह कहने वाले कुरान अली, साहबान अली और अमजद अली ने पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई हैं। इनका कहना है कि जिस अधिकारी ने उसको मामले में गवाह बनाया है, वो उससे कभी नहीं मिले और न ही उन्हें जांच के लिए बुलाया गया। अली ने कहा, 2008-09 में जब ये जांच की गई मैं अपने गांव में नहीं बल्कि गुवाहाटी में था और सनाउल्लाह भी उस समय सेना के साथ थे। मोहम्मद सनाउल्लाह का सर्विस रिकॉर्ड दिखाता है कि इस मामले की कथित जांच के समय यानी मई 2008 और अगस्त 2009 में मोहम्मद सनाउल्लाह मणिपुर में थे।

विदेशी घोषित किए गए सनाउल्लाह गलत जांच की वजह से डिटेंशन कैंप भेजे गए हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2009 में इस मामले की जांच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि यह गलत पहचान का मामला लगता है। चंद्रामल दास का कहना है कि आर्मी सूबेदार वह व्यक्ति नहीं हैं, जिनसे उन्होंने पूछताछ की थी। जिस मामले की उन्होंने जांच की थी वह अलग था. लेकिन उसका नाम भी सनाउल्लाह था, यह गलत पहचान से जुड़ा मामला है।