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अखिलेश यादव ने दिया मायावती को झटका, दयाराम पाल के साथ एक दर्जन BSP के नेता SP में शामिल

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लखनऊ, जेएनएन। उपचुनाव से पहले सपा ने बसपा को एक तगड़ा झटका दिया। बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दयाराम पाल व मिठाई लाल को सैकड़ों समर्थकों समेत सदस्यता ग्रहण कराते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबके लिए दरवाजे खुले होने की बात कही। उनका कहना था कि पार्टी में लेते हुए दर्ज मुकदमों को भी न देखेंगे।

शुक्रवार को सपा मुख्यालय में आयोजित सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में अखिलेश ने शिवपाल यादव की वापसी के सवाल पर गोलमोल जवाब दिया। उन्होंने कहा, हम पर परिवारवाद के आरोप लगते हैं जबकि हमारे परिवार में लोकतंत्र है। कोई भी जिस विचारधारा से जुड़ना चाहे, जुड़ सकता है। जहां भी जाना चाहे, जा सकता है, आना चाहे तो वह आ भी सकता है। 2022 में सरकार बनानी है तो परिवार बढ़ाना पड़ेगा, दयाराम पाल और उनके तीनों पुत्र भी इसी लिए पार्टी में शामिल हुए है। जो आएगा, उसे आंख बंद कर शामिल किया जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में अंगे्रजों ने डिवाइड एंड रूल चलाया था अब डराओ एंड रूल चल रहा है। डिवाइड एंड रूल वालों को भगा दिया, अब डराने वालों को भगाना है। एनआरसी लागू करने के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि सबसे पहले मुख्यमंत्री को ही बाहर जाना होगा। उन्होंने कहा कि अब लोकतंत्र सीबीआइ, ईडी और आयकर वालों के सहारे चल रहा है। इससे बचे तो खबरें चलवाकर बदनाम कराया जा रहा हैं। उन्होंने योगी सरकार का काउंट डाउन आरंभ होने का दावा किया।

खजांची को गोद ले बैंक

अखिलेश ने नोटबंदी के दौरान बैंक के बाहर पैदा हुए बालक खजांची को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसका परिवार बदहाल है। रिजर्व बैंक और पंजाब नैशनल बैंक को चाहिए कि वो खजांची को गोद लें। उसका घर बनवाएं और हर महीने दस हजार रुपये दें। उनका कहना था कि खजांची के कमाने लायक होने तक उसका खर्चा सपा उठाएगी।

कोर्ट से न्याय की उम्मीद

अखिलेश ने चिन्मयानंद प्रकरण पर कोर्ट से न्याय की उम्मीद जताते हुए कहा कि आजम खां का अपराध यही है कि उन्होंने एक यूनिवर्सिटी बनवा दी। उन्होंने आजम के मामले में भी कोर्ट से न्याय की आस जताई और मंदिर निर्माण पर कोर्ट का फैसला स्वीकारने की बात दोहराई।