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अखिलेश-मायावती का सपा-बसपा गठबंधन: क्या बिछड़ने के लिए साथ आए थे

लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन में दरार की ख़बरें आ रही हैं.

पार्टी सांसदों और कार्यकर्ताओं के साथ हुई बैठक में बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा है कि विधानसभा की 11 सीटों पर उपचुनाव बीएसपी अकेले लड़ेगी. इससे पहले बीएसपी उपचुनाव नहीं नहीं लड़ती थी.

मायावती की इस घोषणा के साथ ही समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के अलग होने की बात शुरू हो गई है.

पूरे घटनाक्रम पर पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरन का नज़रिया

ऐसा लगता है कि सपा-बसपा के गठबंधन में दरार पड़ गई है क्योंकि पहली बात तो यह कि मायावती कभी उपचुनाव नहीं लड़ा करती थीं.
हैं. 2014 में उन्हें एक भी सीट नहीं मिली थी. इस बार उन्हें 10 सीटें मिली हैं.

कहीं ना कहीं उन्हें दूसरी जाति का भी वोट मिला. गठबंधन की वजह से यादव वोट उन्हें मिला है लेकिन मायावती का कहना है कि अखिलेश यादव वोट ट्रांसफर नहीं करा पाए, इसलिए मैं अलग हो रही हूं.

वहीं समाजवादी पार्टी को दो तरह का नुक़सान हुआ. अखिलेश की छवी दूसरे व्यक्ति को तौर पर बनी. वो मायावती को सम्मान देते रहे. लोगों को ये लगा कि उनकी लीडरशीप से भी दिक्क़त हुई.

दूसरी बात ये कि वो 36 सीटों पर लड़े. इसका मतलब वो बाक़ी की सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतार पाए. उससे उनको काफ़ी नुक़सान हुआ. सीटों का भी नुक़सान हुआ और उनका वोट प्रतिशत भी गिरा.